नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भी भारत के प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। लेकिन, 2014 की तुलना में भाजपा को नुकसान जरूर उठाना पड़ेगा। यह भी कहा जा रहा है कि यदि समाजवादी पार्टी, बसपा और तृणमूल और कुछ अन्य ‍दल मिलाकर महागठबंधन बनाते हैं तो त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति भी बन सकती है।

2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर कार्वी इनसाइट्स-इंडिया टुडे द्वारा कराए गए सर्वे में एनडीए को 36 प्रतिशत के लगभग वोट मिल सकते हैं, जबकि भाजपा 282 सीटों से 245 सीटों पर सिमट सकती है। अर्थात यहां भगवा पार्टी को 2014 की तुलना में नुकसान होता दिख रहा है। हालांकि राहत की बात यह हो सकती है कि एनडीए (281) बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंच सकता है।
इस सर्वे के मुताबिक यूपीए 31 फीसद वोटों के साथ 122 सीटें हासिल कर सकता है। वर्तमान स्थिति की तुलना में कांग्रेस को अच्छा फायदा होता दिख रहा है। कांग्रेस को 83 सीटें मिल सकती हैं। वर्तमान में कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं। इस सर्वे के मुताबिक अन्य के खाते में 140 सीटें आ सकती हैं, जबकि सपा, बसपा और तृणमूल गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हैं तो एनडीए का गणित गड़बड़ा सकता है।
यह सर्वे देश के 19 राज्यों की 194 विधानसभा सीटों और 97 लोकसभा सीटों पर किया गया, जिसमें कुल 12 हजार 100 लोगों से बात की गई। इनमें से 68% ग्रामीण और 32% शहरी मतदाता थे।
नरेन्द्र मोदी पहली पसंद : सीटों का गणित क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी भारत के लोगों की पहली पसंद हैं। इस सर्वे के मुताबिक 49 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि मोदी को ही फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी यह सर्वे खुशी देने वाला है। इसके मुताबिक 27 फीसदी लोग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। ऐसे में भविष्य में उनके लिए संभावनाएं काफी अच्छी हैं। साथ मोदी टक्कर में विपक्ष से एकमात्र नेता राहुल गांधी ही दिखाई दे रहे हैं।
मोदी और राहुल के अलावा और कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो इनके आसपास ठहरता हो। सर्वे में 3-3 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री पद पर ममता बनर्जी और प्रियंका गांधी को देखना चाहते हैं, वहीं इस शीर्ष पद के लिए अरुण जेटली, अरविन्द केजरीवाल और पी. चिदंबरम को सिर्फ 2-2 फीसदी वोट ही मिले।