जम्मू कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए ग्रेनेडियर निलेश सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। गांव के पास मझुई नदी के घाट पर शहीद के दस वर्षीय बेटे अंश ने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा नीलेश तेरा नाम रहेगा’ के उद्घोष से आसमान गूंज उठा। शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हर किसी की आंखें नम थीं। डोगरा रेजीमेंट फैजाबाद के सैनिकों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह, डीएम संगीता सिंह और एसपी अमित वर्मा ने भी शहीद को श्रद्धांजलि दी।

अखंडनगर क्षेत्र के नगरी निवासी रामप्रसाद के सैनिक पुत्र नीलेश सिंह (31) की तैनाती वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के शोपियां में थी। रविवार को आतंकियों के साथ मुठभेड़ में निलेश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में सेना के चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार रात करीब दस बजे सेना के विशेष विमान से इलाहाबाद पहुंचा। मंगलवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव अखंडनगर के नगरी लाया गया। तब तक हजारों लोगों का हुजूम गांव में इकट्ठा हो चुका था। शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। (शहीद की पत्नी अर्चना सिंह।)

पार्थिव शरीर को उनके आवास के सामने रखा गया। इस बीच परिवारीजनों सहित हजारों लोगों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए। शहीद के परिवारीजन, रिश्तेदार व ग्रामीण दहाड़े मारकर रो रहे थे।  सोमवार तक घर के बुजुर्गों को सांत्वना दे रहा शहीद का दस वर्षीय बेटा अंश भी पिता के अंतिम दर्शन कर बिलख पड़ा। करीब डेढ़ वर्ष के छोटे बेटे शिवाय को परिवारीजन संभाल रहे थे। उस मासूम को इस बात का इल्म तक नहीं था कि अब जीवन में कभी पिता रूपी आसमान की छाया नहीं मिल सकेगी।

करीब साढ़े दस बजे शहीद की अंतिम यात्रा मझुई घाट को रवाना हुई। अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल रहे। रास्ते से लेकर मकान की छतों तक पर खड़े लोग शहीद नीलेश के अंतिम दर्शन को बेताब दिखे। लोगों में गम के साथ पाकिस्तान के प्रति रोष रहा। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा निलेश तेरा नाम रहेगा’, ‘निलेश तेरा यह बलिदान याद करेगा हिंदुस्तान’, वंदे मातरम् और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से आसमान गूंज रहा था।

शहीद का पार्थिव शरीर करीब 11 बजे मझुई घाट पहुंचा। घाट पर पहले से ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई थी। डोंगरा रेजीमेंट फैजाबाद से आए सैनिकों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। औपचारिक कर्मकांड के बाद शहीद के बेटे अंश ने पिता को मुखाग्नि दी।

बेटा, तुम सेना में और बड़े अधिकारी बनो
शहीद के पार्थिव शरीर के साथ जम्मू कश्मीर से सूबेदार श्रीचंद्र और नायक सुरेंद्र सिंह नगरी गांव पहुंचे थे। शहीद नीलेश के बेटे अंश ने सेना के दोनों अधिकारियों से फिर अपनी इच्छा दोहराई। कहा, अंकल मैं सेना में भर्ती होकर सौ पाकिस्तानियों को मारकर अपने पापा की मौत का बदला लूंगा। दोनों अधिकारियों ने अंश के सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया। कहा, बेटा तुम्हारे पिता फौज में लांस नायक थे। हम चाहते हैं कि तुम पढ़ लिखकर सेना में उनसे भी बड़े अधिकारी बनो। (शहीद की पत्नी व बच्चे को ढ़ाढस बंधाती डीएम संगीता सिंह।)

पूरी हुई पुष्प की अभिलाषा
राष्ट्रीय कवि माखनलाल चतुर्वेदी लिखित… मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएं वीर अनेक रचित पुष्प की अभिलाषा मंगलवार को पूरी होती दिखी। कुंदा भैरवपुर, ढबरुआ बाजार समेत रास्ते के सभी चौराहों पर लोग शहीद के अंतिम दर्शन को सुबह से ही कतार में खड़े थे। शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने पर लोगों ने उस पर पुष्प वर्षा की। गांव में भी लोगों ने अपने मकान की छतों से शहीद को पुष्प अर्पित किए। लोगों ने शहीद नीलेश अमर रहे के नारे लगाए। (पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।)