गेस्ट्रोइंटेराइटिस एक ऐसी हेल्थ प्रॉब्लम है, जो पाचन तंत्र में इंफेक्शन और सूजन से पैदा होती है। पेट से संबंधित यह समस्या ज्यादा लंबे वक्त के लिए नहीं होती, लेकिन समय पर इलाज न हो तो यह बढ़ सकती है।
गेस्ट्रोइंटेराइटिस के कारण – इसे पैदा करने वाले कारकों में वायरस, बैक्टीरिया, बैक्टीरियल जहर, परजीवी, विशेष केमिकल और कुछ दवाएं शामिल हैं। संक्रमित फल, खाद्य पदार्थ के साथ-साथ दूषित पानी भी इस बीमारी के फैलने का दूसरा अहम कारण है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अपेक्षाकृत स्वच्छता का अभाव, बच्चों को आसानी से इस बीमारी का शिकार बना सकता है।
कब हो सकती है समस्या – खास तौर से बारिश एवं गर्मी में दिनों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
गेस्ट्रोइंटेराइटिस के लक्षण –

पाचन तंत्र में संक्रमण, सूजन, पेट में ऐंठन, दस्त, उल्टी, भूख में कमी, जी मिचलाना ,तेज ठंड लगना, त्वचा में हल्की जलन, अत्‍यधिक पसीना, बुखार, जोड़ों में कड़ापन, मांसपेशियों में तकलीफ, वजन में कमी आदि शामिल हैं।

गेस्ट्रोइंटेराइटिस के इलाज एवं जांच के लिए यह जानना जरूरी है कि आपको किस तरह का गैस्ट्रोइन्टेराइटिस है। प्रकार को जानने के बाद इसके इलाज के लिए मरीज की हिस्ट्री जानी जाती है। उसके बाद विधियों में बॉडी चेकअप, ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट के माध्यम से परीक्षण किया जाता है।
गेस्ट्रोइंटेराइटिस से बचाव –

1
इस समस्या से बचने के लिए घर का स्वच्छ खाना ही खाएं, बासी भोजन न खाएं।
दूषित पानी का प्रयोग कभी न करें।
3 भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं।
पानी को अच्‍छे से उबाल कर ठंडा करके पिएं या वॉटर प्यूरिफायर का प्रयोग करें।
5 पानी एकत्रित होने न होने दें।
6 फल-सब्जियां सभी धोकर प्रयोग करें।