नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने यौन हिंसा के मामले में आरोपी स्वयंभू उपदेशक दाती महाराज से सोमवार को कहा कि पीड़िता द्वारा अदालत से सूचना छिपाए जाने संबंधी अपनी शिकायत के समाधान के लिए वे दिल्ली उच्च न्यायालय जाएं। हालांकि शीर्ष अदालत ने दाती महाराज को उच्च न्यायालय द्वारा मामले के अंतिम रूप से निपटाए जाने के बाद फिर उसके पास आने की छूट प्रदान की है।
न्यायमूर्ति एनवी रमण और न्यायमूर्ति एमएम शांतानागौदर ने दाती महाराज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से कहा कि वे यौन हिंसा के इस मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश देने वाले उच्च न्यायालय के पास जाएं। रोहतगी ने कहा कि जिस याचिकाकर्ता की याचिका पर उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, उसने यह तथ्य छिपाया कि उन्हीं वकीलों द्वारा दायर गई आपराधिक याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी और यहां तक कि शीर्ष अदालत में भी याचिका वापस ले ली गई थी।
रोहतगी ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के साथ छल करके आपराधिक अवमानना की है। उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि सीबीआई जांच की उनकी याचिका उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। पीठ ने कहा कि दाती महाराज ये शिकायतें उच्च न्यायालय के समक्ष रख सकते हैं जिसके पास यह मामला लंबित है।
इसके बाद रोहतगी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय द्वारा इसका अंतिम फैसला करने के बाद शीर्ष अदालत आने की अनुमति प्रदान की जाए। पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए इसे खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद फिर शीर्ष अदालत आने की छूट प्रदान कर दी।
दाती महाराज ने यौन हिंसा का मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने के उच्च न्यायालय के 3 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी थी। दाती मदनलाल उर्फ दाती महाराज और उनके 3 भाइयों तथा 1 महिला के खिलाफ 7 जून को दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में एक शिकायत दायर की गई थी और 11 जून को प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
दाती महाराज की एक अनुयायी ने उन पर दिल्ली और राजस्थान के आश्रमों में उसका बलात्कार करने का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने 22 जून को दाती महाराज से पूछताछ की थी। आरोपी दाती महाराज का दावा है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।